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Showing posts from January, 2026

अपने काम को प्यार करो

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आपका काम आपको इज्जत देगा । अपने को व्यवस्थित रखना, अपने दिन के समय का हिसाब रखना, और शांत होकर नींद में जाएं। कर्म और यात्रा की शुरुआत ,परमात्मा के नाम से करनी चाहिए। आप क्या हैं यही आपको जानना है और निज रूप में ठहरे। मतलब वास्तविकता में रहे, जिसमें वक्त का पता ना लगे आपका वास्तविक स्वभाव निश्चित और निर्भयता का है जबकि मनुष्य डरा हुआ है अपने निज रूप में आना ही जीवन का आनंद है। Watch Now:

अपनी विनम्रता को बनाए रखना।

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 किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी प्रगति और उसकी सज्जनता ही उसकी ऊंचाई का पैमाना है। जब हम दिल से एक दूसरे के प्रति प्रेम अर्पित करते हैं तो वह हमारे आंखों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। व्यक्ति को अपने अंदर विनम्रता बनाए रखना चाहिए । साथ ही अपने हाथ से दान पुण्य, सेवा, और सहयोग करते रहना चाहिए। इस तरह की सद्भावना वाला मनुष्य भगवान का अति प्रिय होता है। अपने कल्याण के साथ-साथ लोक कल्याण के लिए भी स्वयं को अर्पित करें। लोक कल्याण के लिए किया गया कार्य हमारे जीवन को सार्थक बनता है। अच्छे कार्यों के लिए हमेशा कुछ ना कुछ योगदान देते रहना चाहिए। जो व्यक्ति अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है वह भगवान की नजर में सबसे कीमती व्यक्ति होता है। Must Watch:

सहयोग, दया और क्षमा क्यों महत्वपूर्ण हैं?

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Must Watch Above video: जो व्यक्ति दूसरों की तकलीफ को समझ कर उसे उसके तकलीफ से बाहर निकालता है तो वह परमात्मा का प्यार इंसान होता है । भगवान कहते हैं कि यदि आपके सहयोग से किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट आती है तो वह मेरा अति प्रिय होता है, और उसके उपर मेरी कृपा हमेशा बनी रहती है। जो व्यक्ति हर एक प्राणी पर दयादृष्टि रखता है, तथा दूसरों के बच्चों को अपना बच्चा से भी बढ़कर प्यार करता है तो वह व्यक्ति पूज्यनीय होता है । भगवान के प्रति आपकी भक्ति आपके पूरे स्वरूप को बदल देती है। यह आपको एक अच्छा और ऊंचा इंसान बनाती है। जिस व्यक्ति के अंदर क्षमा की भावना होती है तथा उसे क्षमा करना और करवाना आता है तो वह व्यक्ति भगवान की नजर में बहुत कीमती होता है।

प्रेम, शांति और आनंद का मसीहा बनें।

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हमारी प्रार्थना में बहुत ताकत है । जब हम परमात्मा के समक्ष बैठकर श्रद्धा भाव से प्रार्थना करते हैं तो चमत्कार दिखाई देता है। लेकिन हर वक्त परमात्मा के समक्ष मांगने की आदत ना डालकर, परमात्मा को हरेक कार्य के लिए धन्यवाद देने की आदत डालें। प्रभु के समक्ष सर्वप्रथम आसन पर बैठकर नाम जपने की आदत डालें ।फिर प्रार्थना कर हर एक काम के लिए परमात्मा को धन्यवाद दें । रोज अपना हृदय भगवान से जोड़ और स्तुति करते हुए सच्चे हृदय से धन्यवाद कर ध्यान में बैठे फिर प्रार्थना करें तो कृपा अवश्य होती है । परमात्मा अपने बच्चों में दयालुता देखना चाहते हैं। जब आप किसी के मुसीबत में खड़े होते हैं और क्षमावान बनकर, समस्याओं को सुलझाने वाले बनते हैं। तो भगवान का आशीर्वाद आपको स्वत: प्राप्त होने लगता है। Must Watch This Video :

मानसिक शांति बहुत आवश्यक है

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शरीर और मस्तिष्क को आराम देना चाहिए। शांति परमात्मा के चरणों में है शांति के लिए प्रतिदिन इसका अभ्यास करना चाहिए, शांति के मंत्र बोले जिसमें,प्रकृति की बहुत सारी चीजों से शांति हमें प्राप्त होती है शांति बोलने से भी शांति आती है अपने से कहिए मैं परमात्मा के प्रति कृतज्ञ हूं क्योंकि श्रद्धा विश्वास से ही आदमी आगे बढ़ता है प्यार ही है जो आदमी को आगे बढ़ाता है प्यार वह है जहां शिष्टाचार हो दूसरों के बारे में आप में करुणा हो दया भाव हो आदर देना आपको आना चाहिए यह आपके संस्कार होने चाहिए यह आपकी दौलत है जो आपके ऊपर उठ।ती है Must Watch now:

प्रेम श्रद्धा की दौलत

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जीवनी शक्ति को प्रबल बनाने के लिए अपने प्रेम को श्रद्धा की दौलत बनाएं। जो भक्ति में श्रद्धा नहीं रखते हैं वे प्रभु को प्राप्त नहीं कर पाते हैं। और  संसार के सुख-दुख के चक्र में फंसे रह जाते हैं । उन्हें आगे ले जाने का कार्य प्रभु के प्रति उनकी श्रद्धा ही होती है । इसलिए हमेशा अपने अंदर श्रद्धा की दिया को जलाए रखें। भक्ति को जिंदा रखने के लिए श्रद्धा की आवश्यकता होती है। जिससे हमें परमात्मा की प्राप्ति होती है। इसलिए अपनी श्रद्धा को उज्जवल बनाएं । पूरे ब्रह्मांड की फैली हुई दैवीय शक्ति को अपनी और खींचने के लिए आप अपने माला के द्वारा जाप कर प्रभु की नजदीकियां को पा सकते हैं। जो कभी ना बदले उसे प्रणव कहते हैं और वह हैं परमात्मा। आपका शरीर पंचतत्व से बना है इसलिए उसे हमेशा तरो ताजा बनाए रखने के लिए प्रकृति से जुड़े । Must Watch This Video :

आनंद और शांति कैसे प्राप्त करें?

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जब भी परमात्मा के सामने बैठें तो सच्चे दिल से प्रार्थना करें। उनके सामने आंसू प्रकट कर अपना दिल हल्का कर लें । लेकिन प्रतिदिन रोने की आदत ना डालें। कोई भी विधि - विधान चमत्कार तब करता है जब आपकी श्रद्धा और विश्वास गहरी होती है।अपनी श्रद्धा और विश्वास को आप जितना बढ़ाएंगे उतना ही चमत्कार होगा। परमात्मा के समक्ष प्रतिदिन एक समय में बैठकर प्रार्थना करें। प्रार्थना में बहुत शक्ति और शांति है। जब भी आप जाप करने बैठें तो श्रद्धा से अपने प्रभु का आह्वान करें। फिर जाप करना शुरू करें और इस तरह धीरे-धीरे ध्यान में चलें जाएं। ऐसा करते रहने से आप महसूस करेंगे की आप पर कृपा हो रही है। कोई भी कार्य करें भगवान को याद कर उनको धन्यवाद दें । फिर अपना काम शुरू करें। सोने से पहले भगवान को धन्यवाद देकर सोयें और धन्यवाद करते हुए ही उठें। Must Watch:

वाणी का सदुपयोग निस्वार्थ भावना से करें

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सुखी होने के लिए जीवन में शांति और वाणी में मधुरता बहुत जरूरी है । व्यक्ति सब कुछ भूल सकता है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूल सकता है। इसलिए अपनी वाणी में संतुलन बनाए रखना चाहिए। । जीवन में शांति बनाए रखने के लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर वाणी हिंसा से बचना चाहिए । जब हमारा मन अशांत होता है तो हम परमात्मा के शरण में जाते हैं। जहां हमें शांति की प्राप्ति होती है। कड़वे वचन ना तो बोले और ना हीज्यादा दिनों तक याद रखें । जब हम एक दूसरे को निस्वार्थ भावना से निभाना सीख जाते हैं‌ तो हमारे घर में शांति का वातावरण बन जाता है और हमारे जीवन में शांति आती है। Must Watch This Video:-