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इरादा नहीं तरीका बदलें।

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 इरादा नहीं तरीका बदलें। Click here  and Watch Full Video:-  भीतर से अपना स्वर्ग निर्मित करें ,अपनी ऊर्जा को नीचे से ऊपर की तरफ ले जाए ,फिर जो घटित होगा, वह अद्भुत होगा। जब सद्गुरु आपके जीवन में आते हैं तो उनकी बताई हुई विधि से पहले परमात्मा से जुड़े फिर वहां से कुछ खींचना शुरू करें जिससे आपको शांति महसूस होगी, आप निर्भय हो जाते हैं अपने को आनंदित महसूस करते हैं इसलिए प्रतिदिन पूजा पाठ के माध्यम से उससे जुड़ना शुरू करें आपकी बाहरी दुनिया बदली हुई नजर आएगी इसके लिए प्रार्थना पूर्वक प्रयास के साथ कार्य करें अपने तप तथा इरादों पर कार्य करना शुरू करें 

तितिक्षा तप क्या है?

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व्यक्ति का स्वभाव जितना अधिक चंचल होता है। वह आंतरिक रूप से उतना ही कमजोर होता है। उसके जीवन में सहनशीलता और धैर्य की उतनी ही कमी होती है। जिससे वह स्वयं को नुकसान पहुंचता है। इसलिए स्वयं को आंतरिक रूप से शक्तिशाली बनायें और अपने समस्त इन्द्रियों को संयमित करें। यह भी एक तरह का तप है। जिसे हम तितिक्षा तप कहते हैं। जिसमें हम किसी दूसरे को बर्दाश्त करते हैं और उसके साथ जीवन निभाते हैं। तो यह हमारा तितिक्षा तप है। इस तप में हम स्वयं पर नियंत्रित कर संतुलन को बनाए रखने का अभ्यास करते हैं और प्रतिकूल परिस्थितियों को अपनी शक्ति बनाकर जीवन में आगे बढ़ते हैं।

ग्रंथों के प्रति श्रद्धा रखें।

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 ग्रंथों के प्रति श्रद्धा रखें। जब आप काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, मद और मत्सर जैसी चीजों पर नियंत्रण रख कर जीवन को संतुलित बनायेंगे तभी आपका जीवन आनंदित होगा। इसलिए अपने मन को पवित्र रखें। जिससे हृदय में प्रेम पनपेगा और चेहरे में मुस्कुराहट आएगी। जब आप अपने ग्रंथों के प्रति श्रद्धा रखते हुए सत्संग में रुचि लेने के साथ-साथ एक अच्छे साधक, श्रोता, शिष्य और भक्त बनकर अपना आसन संभालते हुए आंखें बंद कर प्राणायाम, ध्यान, आत्म चिंतन, प्रार्थना और भजन गाते हैं और अपने घर के लिए प्रभु से मंगल कामना करते हैं। तो कृपाएं स्वत: ही होने लगती है। और आपको जीवन में सफलताएं मिलने लगती है।