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Showing posts from August, 2025

परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग

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  परमात्मा से जुड़ने का सरल मार्ग ई श्वर सर्वत्र व्याप्त हैं — वे हर प्राणी के हृदय में निवास करते हैं। परमात्मा अंतर्यामी, अनंत, सर्वशक्तिमान और जगदाधार हैं। उन्हें लोग अलग-अलग नामों और रूपों से पूजते हैं, लेकिन सच्ची श्रद्धा, भावना, विश्वास और प्रेम से की गई भक्ति प्रभु तक अवश्य पहुंचती है। जब हम तल्लीन होकर भगवान को पुकारते हैं, तो हमारी पुकार उन्हें सुनाई देती है। व्यक्ति जब ईश्वर में लगन लगा लेता है, तो उसका जीवन भक्ति में सफल हो जाता है और वह प्रभु से संबंध जोड़ लेता है। यही संबंध प्रभु की कृपा का रूप बनकर हमें एक अदृश्य ‘रक्षा कवच’ प्रदान करता है। 🙏 सत्य मार्ग पर चलें, प्रभु से प्रेम करें और उनकी भक्ति में मन लगाएं – यही जीवन की सच्ची सफलता है।" जब हम तल्लीन होकर भगवान को पुकारते हैं, तो हमारी पुकार उन्हें सुनाई देती है। व्यक्ति जब ईश्वर में लगन लगा लेता है, तो उसका जीवन भक्ति में सफल हो जाता है और वह प्रभु से संबंध जोड़ लेता है। यही संबंध प्रभु की कृपा का रूप बनकर हमें एक अदृश्य ‘रक्षा कवच’ प्रदान करता है। 🙏 सत्य मार्ग पर चलें, प्रभु से प्रेम करें और उनकी भक्ति में मन लग...

प्रभु कृपा से बुद्धि को सुबुद्धि बनाएं

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  प्रभु कृपा से बुद्धि को सुबुद्धि बनाएं हम सभी अपने पिछले जन्म के संस्कार लेकर इस जन्म में आए हैं। उसके अनुरूप ही हमारी आदतें और हमारे अंदर की भावनाएं भी बन जाती है और इस भावनाओं के अनुरूप कि हम अपने-अपने कर्म करते हैं। जो मार्ग अशुभ है वहां से स्वयं को हटाकर अपने मन में वैराग्य लाएं और शुभ मार्ग पर चलने का अभ्यास करते हुए अपना भला करें। प्रभु सबके हृदय में विराजमान है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समस्त भाव-भावना के साथ प्रभु के शरण में जाना चाहिए। तभी हमें परम पद की प्राप्ति होगी। प्रभु की शरण में जाने से पहले एक नियम बनाएं और निश्चित समय पर बैठकर माला जपने की आदत डालें। हम सभी को नियम पूर्वक प्रभु का ध्यान करते हुए अपने जिह्वा पर परमात्मा का नाम चलाते रहने की आदत डालनी चाहिए। तभी हम प्रभु की शक्तियों को महसूस करेंगे कि वह रक्षक बनकर मेरे साथ चल रहे हैं और उनकी कृपाओं से हमें परम शांति की प्राप्ति हो रही है। View full video:- 

परमात्मा का अनुशासन क्यों ज़रूरी है?

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  परमात्मा का अनुशासन क्यों ज़रूरी है? गीता हमारा पवित्र ग्रंथ है। यह प्रभु का हृदय भी है। इसका प्रचार प्रसार करने वाला प्रभु का प्रिय पात्र बन जाता है। परमात्मा वह शक्ति है जो हमें सुख शांति देने वाला है। वह सर्वज्ञ अंतर्यामी और सर्वशक्तिमान परम तत्व परमेश्वर भी है। वह पुराणम, सनातन और शाश्वत भी है। क्योंकि वह आदि भी है और अंत भी है। इसलिए हम कह सकते हैं कि ऐसा रूप परमात्मा का ही होता है। जो सभी चीजों को अपने वश में रखकर सारी दुनिया का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर व्यवस्था को चल रहा है। सारी प्रकृति को प्रभु ने अपने अनुशासन में बांध रखा है। परमात्मा द्वारा बनाए गए प्राकृतिक नियमों का पालन हम जितना करेंगे उतना ही सुखी होते चले जाएंगे। परमात्मा की विशेषता क्या है? 2) स्वयं को परमात्मा के अनुशासन से बांधें Click here:- 

ईश्वर से संवाद कैसे हो सकता है?

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ईश्वर से संवाद कैसे हो सकता है?  क्या आपने कभी सोचा है कि यह ब्रह्मांड किसने बनाया? क्या कोई परम शक्ति हमारे जीवन को नियंत्रित कर रही है? इस वीडियो में हम "ईश्वरीय सत्ता" के रहस्य को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करेंगे। यह सिर्फ एक धार्मिक चर्चा नहीं है – यह आत्मा, चेतना, और उस अनदेखी शक्ति के साथ जुड़ाव की एक यात्रा है। Click here :-   

परमात्मा की शरण में जाने के लिए क्या करना चाहिए?

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परमात्मा की शरण में जाने के लिए क्या करना चाहिए? परमेश्वर प्रकाशों का भी वह प्रकाश है जिसे आंखों से नहीं देखा जा सकता बल्कि उसे सिर्फ आत्मा ही अनुभव करती है। जिससे हमें निर्भयता की अनुभूति होती है। क्योंकि वह सर्वव्यापी परम सत्ता सबके अंदर विराजमान है। जब हमारा मन और बुद्धि परमात्मा का हो जाता है तो सुबुद्धि बन जाता है। अपनी बुद्धि को धर्म से जोड़ते हुए दुनिया का भला करें।वह व्यक्ति जो दुनिया का भला करके, उसे जिंदगी देकर इस दुनिया से चला जाता है। तो उसके जाने के बाद भी उनका नाम कोई मिटा नहीं सकता। ऐसे महान पुरुषों और गुरुजनों की शरण ग्रहण करना चाहिए। दुनिया की भीड़ से बाहर निकल कर अपने मन और बुद्धि को परमात्मा को अर्पित कर अपना कल्याण करें। Watch full video:-  

चुनौतियों को जीतने की शक्ति ही जीवन की वसंत ऋतु है |

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 चुनौतियों को जीतने की शक्ति ही जीवन की वसंत ऋतु है | प्रकृति में हर पल नवीनता का संचार होता रहता है। उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को भी अपना आकर्षण बनाए रखना चाहिए। अपने आप को हर पल संभालते हुए स्वयं को पसंद करना सीखें। जिस तरह बसंत ऋतु के आने पर पेड़ अपना नवीनीकरण करता है। उसी तरह हमारे जीवन में भी पतझड़ आते हैं लेकिन हमें अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। जब हम अपने मन को विचार को और मस्तिष्क को नया बनाते हुए जीवन में आगे बढ़ते हैं। तो हमारे जीवन में बसंत ऋतु आती है। अपनी भक्ति को आगे बढ़ाने के लिए हमें दान पुण्य का कार्य करते रहना चाहिए। जो हमारी शक्ति बन हमें सही मार्ग पर चलाते हुए हमारे जीवन में मुस्कान लाती है। हरेक व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए हमेशा सजग सतर्क और सावधान रहना चाहिए। जब हम तीर्थ में या गुरु के पास जाते हैं तो सत्कर्म यज्ञ करते हुए मानसिक रूप से अपनी गलतियां का क्षमा याचना कर एक नये संकल्प के साथ अपनी यात्रा को आगे बढ़ना चाहिए।

तीर्थ जैसा घर, जीवन जैसी पूजा

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 तीर्थ जैसा घर, जीवन जैसी पूजा अपने घर को तीर्थ बनाएं। अच्छी पुस्तके जीवन को बदल देती है ! आदत हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है। इसलिए हमें भक्ति की आदत और खुश रहने की आदत बनानी चाहिए। क्योंकि जिंदगी में उतार चढ़ाव और चुनौतियां सबके जीवन में आती है।अपने घर के मंदिर को तीर्थ बनाएं।आपकी भक्ति ही अपने आप में तीर्थ है।आपके गुरु धर्म और भक्ति ये सभी आपके लिए तीर्थ हैं। क्योंकि ये सभी आपको तारती हैं। शास्त्रों के चिंतन से भी आपकी भक्ति बढ़ेगी ।अच्छी पुस्तकों को अपने घर में रखें। नियम बनाएं और समय निकालकर उसका अध्ययन करें। उससे प्रेरणा लेकर अपने जीवन को आगे बढ़ाएं। वह हमारे लिए एक तरह से ज्ञान रूपी भोजन है। जो हमें भक्ति के माध्यम से मन को एकाग्र कर  ध्यान की ओर ले जाती है। किसी चीज से प्रेरित होकर अपने अंदर की चिंगारी को जागृत कर व्यक्ति आगे बढ़ता है तभी वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है।

सफल और सुखी जीवन के लिए रोज़ करें ये सरल प्रयास

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 सफल और सुखी जीवन के लिए रोज़ करें ये सरल प्रयास स्वस्थ एवं सफल जीवन जीने की चेष्टा करें। वैररहित होकर प्रेमपूर्ण जीवन जीएं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने सफल सुखी जीवन जीने के लिए हर दिन चेष्टा करनी चाहिए। जिससे उनका जीवन शांत आनंदित और प्रसन्नता से भरपूर हो सके। साथ ही उसे अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। हरेक व्यक्ति का जीवन चुनौतियों से भरा होता है।  इसलिए उसे संतुष्ट जीवन जीने के लिए अपने आप को शांत स्थिर रखते हुए आनंदपूर्वक और मुस्कुराते हुए जीवन जीना चाहिए। जो व्यक्ति वैररहित होकर प्रेमपूर्ण जीवन जीता है। वही प्रभु का प्रिय पात्र कहलाता है।

चित्त की निर्मलता और बैर का त्याग: भक्ति का रहस्य!

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 चित्त की निर्मलता और बैर का त्याग: भक्ति का रहस्य! जब तक कोई व्यक्ति जिंदा रहता है तभी तक उसकी दुष्टता भी जिंदा रहती है और तभी तक आप उससे बैर रख सकते हैं क्योंकि यही क्षत्रियों का धर्म है। लेकिन व्यक्तिगत धर्म कहता है कि जब तक आप अपने बैर को खत्म नहीं करेंगे तब तक आपकी ना ही भक्ति सफल होगी और ना ही आप चैन की नींद सो पाएंगे। जिस व्यक्ति की जीविका दूसरों पर आश्रित होती है वह व्यक्ति हमेशा दुखी रहता है। जब आप अहंकार रहित होकर आसक्ति से ऊपर उठते हुए माफ करना सीख जाते हैं और अपनी जिंदगी से संतुष्ट होकर आनंदपूर्वक जीवन जीतें हैं तो निश्चय ही आप प्रभु से जुड़कर उनकी कृपा को प्राप्त कर लेते हैं। जब व्यक्ति अपने चित्त को शांत निर्मल स्वच्छ और निर्भार कर साधना करते वक्त प्रार्थना करते-करते ध्यान में जाता है। तो वह अपनी चेतना को ऊपर की ओर उठाता है। जिससे उसके हृदय की पुकार इतनी गहरी हो जाती है कि ईश्वर झुककर उसके हाथ को पकड़ उसे अपनी गोद में बैठाने को मजबूर हो जाते हैं।

प्रेम से भक्ति तक का मार्ग

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प्रेम से भक्ति तक का मार्ग अपने चित्त को कोमल बना कर उसका शुद्धिकरण करें। चांद्रायण तप क्या है इसे क्यों करना चाहिए ?जब व्यक्ति बैर रहित होकर स्वयं को शांत करता हुआ अपने चित्त को स्वच्छ निर्मल कर प्रभु को साक्षी मानते हुए इसी जन्म में सबको माफ कर, जब आगे बढ़ता है तो उस पर प्रभु कृपा होनी शुरू हो जाती है। इसका सबसे अच्छा तरीका चांद्रायण तप है। यह हरेक व्यक्ति को करना चाहिए क्योंकि इस तप में भी क्षमा भाव आते हैं। जब तक आपका प्रेम मित्रता में नहीं बदलता है, जब तक आपका अहंकार "मैं" गल  कर "मेरा" नहीं हो जाता,  और जब तक आप क्षमावान नहीं बन जाते तब तक आप प्रभु के द्वार में प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि परमात्मा के प्रति अत्यंत प्रेम का नाम ही भक्ति है। जब आपका प्रेम परमात्मा की ओर बहने लगेगा तो आपकी भक्ति भी यहीं से प्रारंभ हो जाएगी। #JeevanPrabhat #Preacher #Guru #Maharajshri #sudhanshujimaharaj #चांद्रायणतप #क्षमाभाव #भुकृपा #भक्तिकामार्ग #आध्यात्मिकशांति #प्रेमऔरभक्ति #अहंकारसेमुक्ति #मनकीशांति #ईश्वरकीओर

इन चार चीज़ों को जान लो, कभी नहीं भटकोगे जीवन में!

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 इन चार चीज़ों को जान लो, कभी नहीं भटकोगे जीवन में! इंसान सब कुछ पाकर भी अधूरा क्यों महसूस करता है? सुख, शांति और संतोष की तलाश में वह जीवनभर भटकता क्यों है? सुधांशु जी महाराज इस प्रेरक प्रवचन में बताते हैं कि भटकाव का असली कारण हमारे भीतर ही छिपा है। जब तक मन और आत्मा का मिलन नहीं होता, तब तक सच्ची तृप्ति नहीं मिलती। इस दिव्य वाणी में जानिए — 🌿 भटकते मन का कारण 🌿 सच्चे सुख का मार्ग 🌿 जीवन में शांति और संतोष पाने का रहस्य

जीवन के साथ अपना आध्यात्मिक प्रगति करें

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  जीवन के साथ अपना आध्यात्मिक प्रगति करें उत्तराखण्ड को हम सभी देवभूमि के नाम से जानते हैं। देवताओं, तपस्याओं और भक्ति का स्थान है। अपने जीवन में इतना उन्नति करें कि आपको भक्ति के साथ आध्यात्मिकता प्राप्त हो। भक्ति ऐसी शक्ति है कि इससे भुक्ति भी मिलती है और मुक्ति भी मिलती है।

धन नहीं मन लगाओ...

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 धन नहीं मन लगाओ अपने निर्विचार अवस्था में अपने को केंद्रित करें, और परमात्मा की निकटता आपको महसूस होने लगेगी। जब आप परमात्मा के हो गए तो आप निश्चिंत हो जाते हैं आप सभी उद्विग्नता से मुक्त हो जाते हैं जैसे पानी पीने से मनुष्य में प्राण रक्षा होती है हमें अपने सुबह को अपने स्वास्थ्य ,मानसिक शुद्धि और शारीरिक शुद्धि के लिए करना चाहिए और अपने को भगवान से जोड़े ।प्रार्थना करें, और परमात्मा का आभार प्रकट करें। आशीर्वाद प्राप्त करें, और शक्ति की प्रार्थना भगवान से करें।

ध्यान द्वारा स्वयं को संपन्न और संतुष्ट महसूस करें।

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ध्यान द्वारा स्वयं को संपन्न और संतुष्ट महसूस करें। प्रभु के प्रेम पात्र बनने के लिए व्यक्ति स्वयं को सक्षम बनाएं, तृप्त और संतुष्ट अनुभव करें, धन्यवादी बनकर जिएं और प्रार्थना करते वक्त अपने मन को शांत और संतुलित रखें। साथ ही अपना ध्यान उस पर केंद्रित करें जो आपको चाहिए। जब आप स्वयं को नियंत्रित कर ध्यान में बैठते हैं तो आप स्वयं को शांत स्थिर करते हुए ब्रह्मांड से जुड़ जाते हैं और ब्रह्मांड से आती हुई ऊर्जा को अनुभव करते हुए परमात्मा के प्रेम से जुड़ते हैं। तब आप स्वयं को संपन्न और संतुष्ट महसूस करते हुए प्रभु के प्रति आभार व्यक्त कर धन्यवाद अर्पित करते हैं। जब आप सत्संगी बनते हैं तो आपकी जिंदगी बदल जाती है। जिससे आप परमात्मा के प्रेम को पाने योग्य बनते हैं।

समय रहते जीवन को संतुलित कर लें

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 समय रहते जीवन को संतुलित कर लें समय रहते हमे अपने पुराने घावों को, पुरानी पीड़ाओं को अपने जीवन से हटा देना चाहिए और एक संतुलित जीवन जीना शुरु कर देना चाहिए, पुरानी चीजों को जितनी जल्दी भुला दोगे उतना आप आनंद से जीवन व्यतित कर पाओगे। क्योंकि अंदर जमा हुई बाते या पीड़ाएं आपको पागल कर देती है। इसलिए उनको भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए