प्रेम से भक्ति तक का मार्ग


प्रेम से भक्ति तक का मार्ग

अपने चित्त को कोमल बना कर उसका शुद्धिकरण करें। चांद्रायण तप क्या है इसे क्यों करना चाहिए ?जब व्यक्ति बैर रहित होकर स्वयं को शांत करता हुआ अपने चित्त को स्वच्छ निर्मल कर प्रभु को साक्षी मानते हुए इसी जन्म में सबको माफ कर, जब आगे बढ़ता है तो उस पर प्रभु कृपा होनी शुरू हो जाती है। इसका सबसे अच्छा तरीका चांद्रायण तप है। यह हरेक व्यक्ति को करना चाहिए क्योंकि इस तप में भी क्षमा भाव आते हैं। जब तक आपका प्रेम मित्रता में नहीं बदलता है, जब तक आपका अहंकार "मैं" गल  कर "मेरा" नहीं हो जाता,  और जब तक आप क्षमावान नहीं बन जाते तब तक आप प्रभु के द्वार में प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि परमात्मा के प्रति अत्यंत प्रेम का नाम ही भक्ति है। जब आपका प्रेम परमात्मा की ओर बहने लगेगा तो आपकी भक्ति भी यहीं से प्रारंभ हो जाएगी।


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