अपनी दैवीय संपदाओं को जगाएं।
भगवान कहते हैं कि दैवीय संपदा को पहचान कर अपने अंदर जगाएं और अपने जीवन में लाएं। भगवान की दी हुई इस दैवीय संपदा को संभालते हुए हमें प्रतिदिन इसे बढ़ाते रहना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मिले हुए सुअवसरों का सदुपयोग समय से नहीं करता है तो उसका जीवन भी दुखदाई हो जाता है। और यदि हम उस सुअवसर का सदुपयोग कर आगे बढ़ते हैं तो हमारा स्वागत लोक और परलोक दोनों जगह के लोग करते हैं। जिससे हमारा जीवन सुखदाई हो जाता है ।इसके लिए हमें अपने बड़ों का सम्मान और युवाओं के प्रति ध्यान देते हुए अपने आर्थिक स्थिति को संभालना है। सबके जीवन में शांति आए उसका भी ध्यान देना है। इस तरह हमें अपने सत्कर्म, साधना, पुण्यकर्म और दिनचर्या को बेहतरीन बनाना है। समय रहते यदि हम इन सब पर ध्यान देंगे तो हमारा परलोक अवश्य सुधर जायेगा।
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