सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दो

 सप्ताह में दो बार अपने घर का ओरा ठीक करने के लिए सात बार आहुति दें। और नौ ग्रहों की शांति के लिए नौ बार आहुति दें। जो अपने घर को सुव्यवस्थित करके नहीं रख सकते उनका जीवन अधूरा है वह कभी भी सुसमृद्ध जीवन नहीं जी सकते हैं। जो व्यक्ति आस्तविकता का जीवन जीता है वही ईश्वरीय भक्ति करता है। वह अपने दिन की शुरुआत ईश्वर से ही करता है और अपने प्रार्थना के द्वारा सब कुछ ईश्वर पर छोड़ देता है । तो, परमात्मा हमें वही देते हैं जो हमारे हित में होता है ईश्वरीय भक्ति से ही हमारा मन पवित्र हो सकता है क्योंकि परमात्मा पतित पावन है। जब कोई भक्त प्रेम से पुकारते हुए ईश्वरी आराधना करता है तो उसका स्वभाव पूर्ण रूप से परमात्मा के रंग में रंग जाता है।

Must Watch This Video :



Comments

Popular posts from this blog

जीवन के हर भाव में मेरा स्मरण करना

आप ही अपने मित्र और शत्रु भी हो

चुनौतियों को जीतने की शक्ति ही जीवन की वसंत ऋतु है |