अपने कर्म को दिव्य बनाएं।
अपने अंतिम समय में व्यक्ति जिस भावना से अपना शरीर का त्याग करता है। तो उसे वैसी ही शरीर की प्राप्ति होती है। इसलिए हमें अपने कर्म को दिव्य बनाते हुए नाम जपने वाले बनकर अपनी भावना को परमात्मा से जोड़े रखें। आप जिस भावना से अपने कार्य को करते हैं वह भावना बहुत अद्भुत होती है। इसलिए जब भी कोई कार्य करें तो दिव्य होकर करें। कृपा निश्चित ही प्राप्त होगी। और उसी रूप में जब शरीर का त्याग करते हैं तो सद्गति की प्राप्ति होती है । जिससे हमारा लोक और परलोक दोनों सुधरता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्म करते हुए अपने प्रगति और सद्गति दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
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