ब्रह्म ज्ञानी की क्या पहचान है?
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जब आप भगवान से जुड़कर कोई भी कार्य करते हैं तो वह कर्म आपका दिव्य कर्म बन जाता है। दिव्य कर्म से व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति को कुछ ना कुछ ज्ञान जरूर अर्जित करना चाहिए ।ब्रह्म ज्ञान व्यक्ति को ऊंचा उठाकर उसके अंदर के देवता को जागृत कर उसे कष्टों से मुक्ति दिलाता है ।इसीलिए कहा जाता है कि ब्रह्म ज्ञानी बनें। जब आप भगवान में ध्यान लगाकर, नाम जपते हुए ,भगवान से संबंध जोड़ कर भक्ति करते हैं तभी आपकी भक्ति सफल होती है। ऐसी भक्ति को ही भगवान योगस्थ कहते हैं। इसलिए संसार की आसक्ति को त्याग कर हर दिन अपने प्रभु को याद कर उनसे जुड़ें । जिससे उनकी दया दृष्टि आपको प्राप्त होगी । और जब आप दुनिया का भला करने वाले बनेंगे तो आपको प्रभु की कृपा किसी न किसी रूप में प्राप्त होगी।
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