अच्छी आदतों का अभ्यास करें

 कर्म का बंधन दुख नहीं बनना चाहिए ,कर्म के संस्कार हमारे चित्त पर पड़ते जाते हैं और अंत समय में यह आत्मा के साथ सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर के रूप में जाता है आगे चलते हुए ठीक उसी प्रकार का अगला शरीर प्राप्त होगा। हमारे सुख दुख का कारण भी यही है जब कोई चीज हमारी आदत बन जाती हैं तो  वह पुनरावृत्ति मांगती है क्योंकि  जिंदगी को  चलाती है आदतें ।और यह केवल इस जन्म तक नहीं अगले जन्म तक जाती हैं इसलिए परमात्मा से शांति और उमंग  मांगे। जब भी आपके जीवन में यह पूर्ण रूप में रहेगा तो यह आपके कर्म और व्यवहार में भी दिखाई पड़ेगा।

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